विजया बैंक - कल और आज --> सिंहावलोकन
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सिंहावलोकन |
राजभाषा कार्यान्वयन |
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सिंहावलोकन
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विजया बैंक की, अपने गृह राज्य, यानी कर्नाटक राज्य में सार्वाधिक शाखाएँ हैं.
वित्तीय वर्ष 2007-2008 के दौरान, बैंक ने 22 शाखाएँ खोली हैं. 2 विस्तार काउंटरों का उन्नयन
किया हैं.
मौजूदा प्रवृत्ति के अनुरूप, बैंक, अपने परिचालन का प्रोद्योगिकीय उन्नयन करने के प्रति अधिक बल
देता रहा है. यथा दिनांक 05.01.2008 को बैंक के 1000 शाखाएँ, 50 विस्तार काउंटर व 203 ए.टी.एम्.
हैं.
619 शाखाएँ, 37 विस्तार काउंटरों, 11 सेवा शाखाओं व 230 केन्द्रों में सी.बी.एस्. प्लॉट फॉर्म पर
कार्य कर रहा हैं जिसके अंतर्गत बैंक का 90.11 प्रतिशत कारोबार प्रावरित हैं.
आपकी लगातार उमडती रहीं एवं विविध प्रकार की जरूरतों को महसूस करते हुए बैंक ने भी विविधीकरण पर
ध्यान देते हुए अनेक नए क्षेत्रों की ओर कदम रखा है जैसे कि क्रेडिट कार्ड, व्यापारी बैंकिग, किराया
खरीद और लीसिंग तथा इलेक्ट्निक प्रेषण सेवाएँ.
विजया बैंक, देश के उन गिने चुने बैंकों में से एक हैं, जिसने वीसा इंटरनैशनल और मास्टर कार्ड
इंटरनेशनल की मूल सदस्यता हासिल की हैं.
विजया बैंक की हर पहले के पीछे उसका प्रेरक बल हैं, उसके 11528 की तादाद में समर्पित
कर्मचारी.
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राजभाषा कार्यान्वयन
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सहायक महा प्रबंधक, प्र.का. का राजभाषा प्रभाग संभालते हैं तथा एक वरिष्ठ प्रबंधक,
एक प्रबंधक, एक सहायक प्रबंधक एवं लिपिक कर्मचारी, इनके अधीन काम करते हैं. इनके अतिरिक्त 10 राजभाषा
अधिकारियों को प्र.का. के विभिन्न विभागों में तैनात किया गया है. सभी 17 क्षेत्रीय कार्यालयों में
एक-एक राजभाषा अधिकारी उपलब्ध कराया गया है.
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पुस्तक, कोश
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प्र.का. के सभी विभागों/शाखाओं/बैंक के कार्यालयों को अंग्रेजी-हिनदी, हिन्दी-अंग्रेजी शब्दकोश
उपलब्ध कराए जा रहे हैं. बैंकिंग व हिन्दी में सामान्य रुचि पर पुस्तकें प्रत्येक वर्ष क्षेत्रीय
कार्यालयों व प्र.का. को उपलब्ध कराए जा रही हैं. राष्ट्रीयकरण के उपरांत बैंक, बैंकिंग के सभी
क्षेत्रों में हिन्दी लागू करता आ राह है. प्र.का. में एक अलग राजभाषा प्रभाग है जो भारत सरकार की
राजभाषा नीति का कार्यान्वयन सुनिश्चित करता है. बैंक ने अपने क्षेत्रीय कार्यालयों में राजभाषा अनुभाग
खोले हैं. बैंक की शाखाओं/कार्यालयों की राजभाषा कार्यान्वयन समितियां, नियमित रूप से तीन महीने में एक
बार बैठकें बुलाकर इन बैठकों में हासिल की गई प्रगति की समीक्षा करती हैं व बैंकिंग के सभी पहलुओं में
राजभाषा के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु योजना बनाती हैं. |
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प्रोत्साहन योजना
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बैंक अपने कर्मचारियों को हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्रदान करता है तथा अंग्रेजी
आशुलिपिकों/अंग्रेजी टंककों को हिन्दी आशुलिपि/हिन्दी टंकण में प्रशिक्षण दिलाता है. प्रबोध, प्रवीण व
प्राज्ञ परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 500/-रु. से 1,200/-रु. तथा हिन्दी आशुलिपि/हिन्दी टंकण में
उत्तीर्ण होने पर 500/-रु. से 1,000/-रु. की प्रोत्साहन राशि दी जाती है.
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नियम 10(4) के अधीन शाखाओं को अधिसूचित करना |
बैंक ने राजभाषा नियम, 1976 के नियम 10(4) के अधीन अब तक 297 शाखाओं/कार्यालयों को
अधिसूचित किया है.
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गृह पत्रिका का हिन्दी खण्ड
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बैंक की गृह पत्रिका 'विजया विकास' के राजभाषा खण्ड में बैंकिंग, प्रशासन, साहित्य
पर लेख दिए जाते हैं.
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अन्य प्रकाशन |
प्र.का. के केंद्रीय निरीक्षण विभाग की त्रैमासिक पत्रिका 'होशियार' द्विभाषी रूप से
मुद्रित हो रही है.
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द्विभाषी साफ्टवेयर |
बैंक ने आकृत आफीस 2006 के लए कंपनी लाईसेंस लिया है व उसे उन सभी पीसी में संस्थापत किया जाएगा
जहां माईक्रोसाफट आफीस कार्य कर रहा है.
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राजभाषा कार्यान्वयन के कुछ महत्वपूर्ण पहलू
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- हिन्दी में प्राप्त सभी पत्रों का उत्तर हिन्दी में दिया जा रहे है.
- साइन बोर्ड, काउंटर बोर्ड व अधिकारियों के नाम पट्ट, क्षेत्रीय भाषा, हिन्दी व अंग्रेजी में
उपलब्ध/प्रदर्शित हैं.
- पत्र शीर्ष, फार्म, रजिस्टर, विज़िटिंग कार्ड, पहचान पत्र तथा सभी लेखन सामग्री मद द्विभाषी
हैं.
- प्रचार सामग्री हिन्दी व अंग्रेजी में हैं.
- प्रकाशन/पुस्तिकाएं हिन्दी व अंग्रेजी में हैं.
- हिन्दी में लिखे गए चेक स्वीकार किए जाते हैं.
- हम हिन्दी में पत्राचार का स्वागत करते हैं.
- बैंक, हिन्दी में भरे गए आवेदन, फार्म आदि स्वीकार करता है.
- फाइल के शीर्षक हिन्दी व अंग्रेजी में लिखे जाते हैं.
- बैंक के समारोह का निमंत्रण पत्र क्षेत्रीय भाषा, हिन्दी व अंग्रेजी में छपाया जाता है.
- अखिल भारतीय स्तर के विज्ञापन हिन्दी व अंग्रेजी में जारी किए जाते हैं.
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