भारत लौटने पर अनिवासी भारतीय, अपनी विदेशी मुद्रा आस्तियां रखने के लिए भारत में निवासी विदेशी
मुद्रा (आरएफसी)खाता खोल सकता है, रख सकता है और उसमें लेन-देन कर सकता है.
आरएफसी खाता, अगर खाता धारक व्यक्ति हो तो चालू अथवा बचत अथवा सावधि जमा (लागू साधारण ब्याज के
साथ न्यूनतम अवधि 1 महीना, अधिकतम अवधि 3 वर्ष)खाते के रूप में और दूसरे सभी मामलों में चालू खाते
अथवा सावधि जमा खाते के रूप में रखा जा सकता है.
आरएफसी खातों में नीचे उल्लिखित जमा किए जा सकते हैं:
1)
भारत के बाहर से ऐसे प्रेषण
क. एनआरआई द्वारा भारत के बाहर रखे गए बैंक खातों में निधि
ख. विदेश में धारित पात्र आस्तियों पर अर्जित आय जैसे; लाभांश, ब्याज, लाभ, किराया आदि.
ग. पात्र आस्तियों की बिक्री प्राप्तियां
2)
भारत लौटने से पहले भारत के बाहर लिए गए रोजगार के निमित्त भारत के
बाहर प्राप्त पेंशन अथवा अन्य मौद्रिक लाभ.
3)
आरएफसी खाते पर अर्जित ब्याज.
4)
लौटनेवाले एनआरआई द्वारा अपने साथ लाए गए विदेशी मुद्रा नोट/यात्री
चेक.
उनमें से कोई अथवा उसकी पत्नी/उसका पति, एक दूसरे का अथवा दूसरे की पत्नी/दूसरे के पति का
माता-पिता और बच्चे, दादा-दादी और पोता-पोती अथवा भाई और बहन के रूप में रिश्तेदार हो.
घ.
एक दूसरे का अनुसूची I-ए में सूचित तरीके से संबंध हो.