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सफाई कर्मचारियों के उन्‍मोचन और पुनर्वास संबंधी योजना (एसएलआरएस)
 
योजना की शुरुआत मार्जिन राशि
उद्देश्‍य उपदान
कार्यान्‍वयन बैंक ऋण
पात्रता ब्‍याज दर
गतिविधियां संसाधन प्रभार
प्रशिक्षण प्रतिभूति
परियोजना निधियन चुकौती
उधारदाताओं की देयता संबंधी उचित व्‍यवहार संहिता
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एसएलआरएस की पेशकश

सरकार ने, सफाई कर्मचारियों के उन्‍मोचन और पुनर्वास के लिए राष्‍ट्रीय योजना, 22.03.1992 को शुरू की थी.
   
उद्देश्‍य

योजना का उद्देश्‍य है, सफाई कर्मचारियों को उनके मौजूदा पुश्‍तैनी और गंदे पेश से आजाद कराना.
   
कार्यान्‍वयन

राज्‍य स्‍तर पर योजना को लागू करने के लिए मुख्‍य एजेंसी राज्य स्‍तरीय अनुसूचित जाति विकास और वित्‍त निगम होंगी. जिला स्‍तर पर, जिला कलक्‍टर/जिला मैजिस्‍ट्रेट/जिले के उप आयुक्‍त, योजना का समग्र कार्यान्‍वयन करने के लिए जिम्‍मेदार होंगे.
 
पात्रता

नगरीय, अर्ध-नगरीय और ग्रामीण इलाक़ों और किसी दूसरे क़सबे में अथवा छावनी मंडलों, सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा बनाई गईं बस्तियों में रहनेवाले सफाई कर्मचारी, इस योजना के तहत शामिल किए जा सकेंगे. सफाई कर्मचारियों के पुनर्वास के लिए कोई उम्र की सीमा नहीं है.
 
गतिविधियां

कृषि और संबद्ध क्षेत्रों, लघु उद्योग अथवा सेवा क्षेत्र के तहत उपदान, मार्जिन और बैंक ऋण देकर, विभिन्‍न व्‍यापार/पेशे में सफाई कर्मचारियों का पुनर्वास.
 
प्रशिक्षण

भारत सरकार/राज्‍य सरकार/संघ शासित प्रशासन द्वारा स्‍थापित संस्‍थाओं में सफाई कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा. प्रशिक्षण का सारा खर्चा, केंद्र सरकार द्वारा उठाया जाएगा. प्रशिक्षण में खास तौर पर स्‍व-रोजगार के लिए जरूरी कुशलता निर्मित करने/बढ़ाने पर ध्‍यान दिया जाएगा. प्रशिक्षण, 15-50 के बीच की उम्र के सफाई कर्मचारियों और उनके आश्रितों तक सीमित होगा.
 
परियोजना निधियन

अधिकतम परियोजना लागत, 50,000/- रु. प्रति हिताधिकारी होगी.
 
उपदान

उपदान, परियोजना लागत के 50% की दर से उपलब्‍ध होगा, जब कि अधिकतम 10,000/- रु. प्रति उधारकर्ता है.
 
बैंक ऋण

परियोजना लागत - (उपदान + मार्जिन राशि, जहां कहीं लागू हो)
 
प्रतिभूति

ऋण में से निर्मित आस्तियों का बैंक के पक्ष में दृष्टिबंधक. राज्‍य अनुसूचित जाति विकास निगमों को, उनकी मार्जिन राशि ऋण सहायता की भरपाई के लिए आस्तियों पर दूसरा प्रभार/समरूप प्रभार निर्मित करने की इजाजत दी जा सकती है.
 
चुकौती

निर्मित आस्तियों की उम्र और हिताधिकारी की चुकौती क्षमता के आधार पर ऋण की चुकौती, 3-7 वर्ष के अंदर (अनुग्रह अवधि सहित) की जानी चाहिए. प्रत्‍येक गतिविधि के लिए अधिकतम छह महीने की अनुग्रह अवधि दी जा सकती है.
 
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