राज्य स्तर पर योजना को लागू करने के लिए मुख्य एजेंसी राज्य स्तरीय अनुसूचित
जाति विकास और वित्त निगम होंगी. जिला स्तर पर, जिला कलक्टर/जिला मैजिस्ट्रेट/जिले के उप आयुक्त,
योजना का समग्र कार्यान्वयन करने के लिए जिम्मेदार होंगे.
नगरीय, अर्ध-नगरीय और ग्रामीण इलाक़ों और किसी दूसरे क़सबे में अथवा छावनी मंडलों,
सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा बनाई गईं बस्तियों में रहनेवाले सफाई कर्मचारी, इस योजना के तहत
शामिल किए जा सकेंगे. सफाई कर्मचारियों के पुनर्वास के लिए कोई उम्र की सीमा नहीं है.
भारत सरकार/राज्य सरकार/संघ शासित प्रशासन द्वारा स्थापित संस्थाओं में सफाई
कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा. प्रशिक्षण का सारा खर्चा, केंद्र सरकार द्वारा उठाया जाएगा.
प्रशिक्षण में खास तौर पर स्व-रोजगार के लिए जरूरी कुशलता निर्मित करने/बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा.
प्रशिक्षण, 15-50 के बीच की उम्र के सफाई कर्मचारियों और उनके आश्रितों तक सीमित होगा.
ऋण में से निर्मित आस्तियों का बैंक के पक्ष में दृष्टिबंधक. राज्य अनुसूचित जाति
विकास निगमों को, उनकी मार्जिन राशि ऋण सहायता की भरपाई के लिए आस्तियों पर दूसरा प्रभार/समरूप प्रभार
निर्मित करने की इजाजत दी जा सकती है.
निर्मित आस्तियों की उम्र और हिताधिकारी की चुकौती क्षमता के आधार पर ऋण की चुकौती,
3-7 वर्ष के अंदर (अनुग्रह अवधि सहित) की जानी चाहिए. प्रत्येक गतिविधि के लिए अधिकतम छह महीने की
अनुग्रह अवधि दी जा सकती है.