डीआरआई हिताधिकारी वे होते हैं जिनको 4% प्र.व. की दर से ऋण और अग्रिम दिए जाते
हैं और जो कुटीर और ग्राम उद्योग से जुडे रहते हैं जैसे; बास्केट बनानेवाले, झाडू बनानेवाले, लोहार,
कार्पेंटर, मोची, साइकिल मरम्मत करनेवाले, जलाऊ लकडी बेचनेवाले, मछली बेचनेवाले, हस्तशिल्प,
फेरीवाले, चमड़े का काम करनेवाले किसान, चारपाई बनानेवाले, पान की दूकान और तंबाकू व्यापारी, पापड़
बनानेवाले, कुम्हार, सड़क के किनारे चाय और खाने की चीज़ें की दूकान, रस्सी बनानेवाले, खाने की
चीज़ें बेचनेवाले, दर्ज़ी, टेरी-बनानेवाले, सब्जी बेचनेवाले, घर पर आकर काम करनेवाले अथवा सामान और
दैनिक ज़रूरतों की चीज़ें देकर जानेवाले, खुद का हाथ का रिक्शा अथवा साइकिल रिक्शा चलानेवाले आदि और
डेरी, मुर्ग़ी पालन, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन आदि जैसी; कृषि और/अथवा उससे संबद्ध गतिविधियां, मामूली
तौर पर चलानेवाले अ.जा/अ.ज.जा. के लोग. आगे, ग्राम और कुटीर उद्योग के क्षेत्र से जुडे तथा कीटनाशक
छिडकाने का काम करनेवाले शारीरिक दृष्टि से विकलांग तथा उच्चतर शिक्षा जारी रखना चाहनेवाले ऐसे होनहार
और जरूरतमंद छात्र, जिनको सरकार अथवा शैक्षिक प्राधिकरणों से छात्रवृत्ति/भरण-पोषण अनुदान नहीं मिलता
है. अर्जक रोजगार करनेवाले शारीरिक दृष्टि से विकलांग व्यक्तियों को योजना के तहत वित्तीय सहायता दी
जा सकती है. |